2020 की 5 लकी राशियां, जानें किसका चमकने वाला है भाग्य

नया साल जैसे-जैसे करीब आ रहा है, लोगों के मन में इस बात की उत्सुकता होने लगी है कि आने वाला साल उनके लिए कैसा रहेगा. 2020 कई लोगों के लिए ऐसा अनुभव लेकर आएगा जो उन्हें जिंदगी भर याद रहेगा. आइए जानते है किन राशियों के लिए लकी साबित होगा साल 2020.

2020 की लकी राशियां

साल 2020 पांच राशि के लोगों के लिए अब तक का सबसे अच्छा साल साबित होगा और इस साल उनकी जिंदगी में कई बड़े बदलाव होंगे. आइए जानते हैं इनके बारे में.

मकर राशि

अगला साल आपके जीवन के सबसे अच्छे दौर में से एक होगा. पिछले कई सालों से आप जिस लक्ष्य को पाना चाह रहे हैं वो आखिरकार आपको 2020 में मिल जाएगा. आपकी सालों की मेहनत अगले साल में सफल हो जाएगी.

मकर राशि वालों के लिए शिक्षा और संतान की दृष्टि से साल 2020 राहू के प्रभाव से अच्छा जाने वाला है. धन प्राप्ति के लिए भी 2020 में आपके लिये अच्छे योग बन रहे हैं. इस समय में आप शेयर मार्किटिंग जैसी योजनाओं में पैसा लगा सकते हैं.

मकर राशि के लोगों की 2020 में अपने पार्टनर के बीच नजदीकियां और बढ़ेंगी. अब तक शनि के कारण आपके जीवन में जो परेशानियां आ रही थीं वो सारी नए साल में दूर हो जाएंगी.

कन्या राशि

कन्या राशि के लोगों के जीवन के सभी क्षेत्र 2020 में फलदायी होंगे. लेकिन इस साल आपकी आर्थिक स्थिति में अच्छा सुधार आएगा और इस साल आपके पास पैसों की कमी नहीं होगी.

कन्या राशि के लोग अगर 2020 में किसी नए चीज पर पैसा लगाने की सोच रहे हैं तो वो बेझिझक इस साल निवेश कर सकते हैं. हालांकि कन्या राशि के लोग कोई भी निर्णय लेने से पहले बहुत सोचते हैं पर 2020 में आप निश्चिंत रह सकते हैं.

2020 में कन्या राशि वालों की रोमांटिक लाइफ काफी अच्छी रहने वाली है. बृहस्पति के प्रभाव से जो लोग अभी तक किसी के साथ रिलेशनशिप में नहीं जा पाए हैं उन्हें 2020 में एक अच्छा पार्टनर मिल सकता है.

वृषभ

वृषभ को बदलाव जल्दी पसंद नहीं आता लेकिन 2020 का बदलाव आपके लिए बहुत अच्छा होगा. साल 2020 में बृहस्पति और शनि आपके लिए भाग्याशाली साबित होंगे. नया साल में आपके जीवन में प्यार और पैसा दोनों लेकर आएगा.

वृषभ राशि वालों को साल की शुरुआत में थोड़ी चिंता या परेशान का अनुभव हो सकता है. लेकिन 2020 में होने वाले बदलाव उनके जीवन में सकारात्मक परिणाम लाएंगे और उन्हें इससे खुशी मिलेगी.

2020 में वृषभ राशि के लोगों को मनचाहा पार्टनर आपको मिलने वाला है. नए साल में आपको जीवन साथी का पूरा सहयोग मिलेगा. अब तक जिन लोगों की शादी नहीं हो पाई है, उनकी बात भी 2020 में बन जाएगी.

सिंह

भाग्य सिंह राशि के साथ हो या न हो, इस राशि के लोग एक स्टार की तरह जिंदगी जीते हैं. ये लोग जहां भी जाते हैं, बिना कोई मेहनत किए ही सुर्खियां बटोर लेते हैं. इनका व्यक्तित्व बहुत ही आकर्षक होता है और लोग इनकी तरफ खिंचे चले आते हैं.

सिंह राशि के जो लोग कई दिनों सेहत की समस्या से परेशान हैं, उनकी सारी परेशानियां 2020 में दूर हो जाएंगी. इस साल उनका स्वास्थ्य बहुत अच्छा रहने वाला है. इसके अलावा करियर और प्यार में भी 2020 आपके लिए कई अवसर लेकर आ रहा है.

सिंह राशि के लोग इस साल खुद को रिलेशनशिप के मामले में सौभाग्यशाली महसूस करेंगे. 2020 आपके लिए रोमांटिक होने के साथ-साथ रोमांचक भरा भी रहने वाला है.

धनु

धनु राशि के लोग बहुत रोमांचकारी होते हैं. धनु राशि के लोगों को कोई भी सीमा नहीं बांध सकती. वो जो सोचते हैं, करके ही रहते हैं. उन्हें अच्छे से पता होता है कि रास्ते में आने वाली बाधाओं को कैसे दूर किया जाता है.

2020 धनु राशि वालों को इन सारी समस्याओं का हल मिलेगा, जिसमें वो पिछले कई दिनों से उलझे हुए थे. इस साल वो अपनी जिंदगी में तालमेल बिठाने में कामयाब होंगे. करियर के मामले में नई ऊंचाइयां छुएंगे और 2020 में खूब ट्रैवेल करेंगे.

2020 में धनु राशि के लोगों की अपने पार्टनर के साथ संबंधों में मधुरता आयेगी. साथी के साथ अब तक की सारी दूरियां अगले साल तक खत्म हो जाएंगी और आपके प्यार की गाड़ी फिर दौड़ेगी.

चंद्रमा का जन्म कैसे हुआ था?

चंद्रमा की उत्पत्ति के बारे में एक नया शोध सामने आया है. इसका मानना है कि अरबों साल पहले एक बड़ा ग्रह पृथ्वी से टकराया था. इस टक्कर के फलस्वरूप चांद का जन्म हुआ.

शोधकर्ता अपने इस सिद्धांत के पीछे अपोलो के अंतरिक्ष यात्रियों के ज़रिये चांद से लाए गए चट्टानों के टुकड़ों का हवाला दे रहे हैं. इन चट्टानी टुकड़ों पर ‘थिया’ नाम के ग्रह की निशानियां दिखती हैं.

शोधकर्ताओं का दावा है कि उनकी खोज पुख़्ता करती है कि चंद्रमा की उत्पत्ति टक्कर के बाद हुए भारी बदलाव का नतीजा थी.

ये अध्ययन एक साइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. वैसे ये कोई नया सिद्धांत नहीं है. ये पहले से माना जाता रहा है कि चांद का उदय खगोलीय टक्कर के परिणाम स्वरूप हुआ था. हालांकि एक दौर ऐसा भी आया जब कुछ लोग कहने लगे कि ऐसी कोई टक्कर हुई ही नहीं.

लेकिन वर्ष 1980 से आसपास से इस सिद्धांत को स्वीकृति मिली हुई है कि 4.5 बिलियन साल पहले पृथ्वी और थिया के बीच हुई टककर ने चंद्रमा की उत्पत्ति की थी.

थिया का नाम ग्रीक पौराणिक कथाओं में मौजूद सीलीन की मां के नाम पर रखा गया था. सीलीन को चांद की मां कहा जाता है.

समझा जाता है कि टक्कर होने के बाद थिया और धरती के टुकड़े एक दूसरे में समाहित हो गए और उनके मिलने से चांद की पैदाइश हुई.

शुरुआती विश्लेषण

ये सबसे आसान थ्योरी है जो कंप्यूटर सिमूलेशन से भी मेल खाती है. लेकिन इसकी सबसे बड़ी दिक्क़त ये है कि किसी ने भी थिया की मौजूदगी का प्रमाण चांद के चट्टानों में नहीं देखा है.

चंद्रमा पर बेशक थिया के निशान मिले हैं लेकिन इसकी संरचना आमतौर पर पृथ्वी सरीखी है. अध्ययनकर्ताओं की टीम के अगुवा यूनिवर्सिटी ऑफ गॉटिंगेन के डा. डेनियल हेवाट्ज के अनुसार, अब तक किसी को इस टक्कर सिद्धांत के इतने दमदार सबूत नहीं मिले थे.

उन्होंने कहा, ”पृथ्वी और चंद्रमा के बीच छोटे-छोटे अंतर हैं, जिसे हमने इस नमूनों में खोज निकाला है. ये टक्कर की अवधारणा को पुख्ता करता है.”

चंद्रमा और पृथ्वी

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हेलीडे उन वैज्ञानिकों में हैं, जो ये देखकर चकित हैं कि चांद की चट्टानों पर मिली थिया की सामग्री और पृथ्वी के बीच अंतर बहुत मामूली और सूक्ष्म हैं.

ओपन यूनिवर्सिटी के डॉक्टर महेश आनंद इस शोध को रोमांचकारी बताते हैं लेकिन वह ये भी कहते हैं, “मौजूदा तथ्य चांद के लाए गए महज़ तीन चट्टानी नमूनों के आधार पर निकाला जा रहा है.”

“हमें इन चट्टानों को पूरे चंद्रमा का प्रतिनिधि मानने के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए. इस लिहाज से चांद की अलग-अलग चट्टानों का विश्लेषण भी ज़रूरी है तभी आगे कुछ पुष्टि की जानी चाहिए.”

कुछ और सिद्धांत बताते हैं कि कि चांद और पृथ्वी की संरचनाएं लगभग एक जैसी क्यों हैं. क्योंकि टक्कर से पहले पृथ्वी और अधिक गति से धूमती थी. एक और सिद्धांत ये है कि थिया आकार में कहीं ज्यादा बड़ा ग्रह था.

विवादित सिद्धांत

एक और विवादित सिद्धांत नीदरलैंड्स के ग्रोनिंजेन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर राव डी मेइजेर का है. उनके अनुसार, पृथ्वी की सतह के करीब 2900 किलोमीटर नीचे एक नाभिकीय विखंडन के फलस्वरूप पृथ्वी की धूल और पपड़ी अंतरिक्ष में उड़ी और इस मलबे ने इकट्ठा होकर चांद को जन्म दिया.

उन्होंने बीसीसी से बातचीत में कहा कि पृथ्वी और चंद्रमा की संरचना में अंतर के नए निष्कर्षों के बाद भी उनके दृष्टिकोण में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

वह कहते हैं, “जिस अंतर के बारे में कहा जा रहा है कि वो बहुत मामूली है. हमें नहीं मालूम कि चांद का निर्माण किस तरह हुआ. ज़रूरत है कि हम चांद पर जाएं और उसकी सतह के काफी नीचे की चट्टानों को खोजें. जो अब तक अंतरिक्ष में आने वाली आंधियों और खगोलीय प्रभावों से प्रदूषित नहीं हुई हैं.”

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The secret book quotes – रहस्य पुस्तक पर सुविचार

The secret book quotes

रहस्य पुस्तक पर – The secret book quotes by Rhonda Byrne

“निराशाजनक स्थिति जैसी कोई चीज नही होती, आपकी जिंदगी का हर एक पल आपकी परिस्थिति को बदल सकता है।”

– Rhonda Byrne, The secret book

“आपकी ताकत आपके विचारो में है, इसीलिए हमेशा जागते रहिये। दुसरे शब्दों में, याद रखना याद रखे।”

– Rhonda Byrne

“आप कौन है? इसका 99% अदृस्श्य और अनछुआ है।”

– Rhonda Byrne

“एक बार मांगिये, विश्वास कीजिये की वह आपको मिल गया है, और फिर उसे प्राप्त करने तक आपको केवल अच्छा महसूस करना है।”

– Rhonda Byrne

“आपके अंदर की गहराई में एक सच बसा हुआ है, जो की इंतजार कर रहा है की आप उसे ढूंढे। और वह सत्य यह है : आप उन सब चीजो के हक़दार है जो जिंदगी किसी को दे सकती है।“

– Rhonda Byrne

“जब भी आप सोचते है की आप कर सकते हैं या आप नहीं कर सकते, इन दोनों ही परिस्थितियों में आप सही होते है।”

– Rhonda Byrne

“आपके विचार ही वस्तु बन जाते है।”

— Rhonda Byrne, The secret book

“सच तो यह है की आपकी सारी जिंदगी में ब्रह्माण्ड आपको जवाब देता रहता है, लेकिन आप उन जवाबो को अपना नही सकते जबतक की आप जागृत ना हो।”

– Rhonda Byrne

“आप ही है जो आकर्षण के नियम को शुरू करते है और यह आप अपने विचारो के जरिये करते है।”

पूस की रात मुंशी प्रेमचंद्र जी की लिखी कहानी

आज कल किसान हर चर्चा का विषय होकर भी कुछ नही है , उसकी वही हालत है जो आज़ादी से पहले था ! अगर देश के नेताओं को हमारे देशी साहित्यों पर भरोसा होता तो शायद इतने वर्ष नही लगते यह जानने मे कि किसान आज भी गरीब है और साहूकारों के चंगुल मे फसा है !

31 जुलाई को प्रेमचंद जी का जन्मदिन है, उनको मेरी तरह से स्रद्धांजलि स्वरूप किसानो की स्थिति की सटीक विवेचना करने वाली कहानी प्रस्तुत कर रहा हूँ ! “पूस की रात”

हल्कू ने आकर स्त्री से कहा-सहना आया है, लाओ, जो रुपए रखे हैं, उसे दे दूँ। किसी तरह गला तो छूटे। 
मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिर कर बोली-तीन ही तो रुपए हैं, दे दोगे तो कंबल कहाँ से आवेगा? माघ-पूस की रात हार में कैसे कटेगी? उससे कह दो, फसल पर रुपए दे देंगे। अभी नहीं। 

हल्कू एक क्षण अनिश्चित दशा में खड़ा रहा। पूस सिर पर आ गया, कंबल के बिना हार में रात को वह किसी तरह नहीं सो सकता। मगर सहना मानेगा नहीं, घुड़कियाँ जमावेगा, गालियाँ देगा। बला से जाड़ों में मरेंगे, बला तो सिर से टल जाएगी। यह सोचता हुआ वह अपना भारी-भरकम डीलडौल लिए हुए (जो उसके नाम को झूठा सिद्ध करता था) स्त्री के समीप आ गया और खुशामद करके बोला-ला दे दे, गला तो छूटे। कंबल के लिए कोई दूसरा उपाय सोचूँगा। 

मुन्नी उसके पास से दूर हट गई और आँखें तरेरती हुई बोली- कर चुके दूसरा उपाय! जरा सुनूँ कौन-सा उपाय करोगे? कोई खैरात दे देगा कंबल? न जाने कितनी बाकी है, जो किसी तरह चुकने में ही नहीं आती। मैं कहती हूँ, तुम क्यों नहीं खेती छोड़ देते? मर-मर कर काम करो, उपज हो तो बाकी दे दे, चलो छुट्टी हुई। बाकी चुकाने के लिए ही तो हमारा जनम हुआ है। पेट के लिए मजूरी करो।

 ऐसी खेती से बाज आएं। मैं रुपए न दूँगी-न दूँगी।

हल्कू उदास होकर बोला-तो क्या गाली खाऊँ?

मुन्नी ने तड़पकर कहा-गाली क्यों देगा, क्या उसका राज है? मगर यह कहने के साथ ही उसकी तनी हुई भौंहें ढीली पड़ गईं। हल्कू के उस वाक्य में जो कठोर सत्य था, वह मानो एक भीषण जंतु की भाँति उसे घूर रहा था। 
उसने जाकर आले पर से रुपए निकाले और लाकर हल्कू के हाथ पर रख दिए। फिर बोली-तुम छोड़ दो अबकी से खेती। मजूरी में सुख से एक रोटी खाने को तो मिलेगी। किसी की धौंस तो न रहेगी। अच्छी खेती है। मजूरी करके लाओ, वह भी उसी में झोंक दो, उस पर से धौंस। 

हल्कू ने रुपए लिए और इस तरह बाहर चला गया मानो अपना हृदय निकालकर देने जा रहा है। उसने मजूरी से एक-एक पैसा काटकर तीन रुपए कंबल के लिए जमा किए थे। वे आज निकले जा रहे थे। एक-एक पग के साथ उसका मस्तक अपनी दीनता के भार से दबा जा रहा था।

पूस की अँधेरी रात। आकाश पर तारे ठिठुरते हुए मालूम होते थे। हल्कू अपने खेत के किनारे ऊख के पत्तों की छतरी के नीचे बाँस के खटोले पर अपनी पुरानी गाढ़े की चादर ओढ़े पड़ा काँप रहा था। खाट के नीचे उसका संगी कुत्ता जबरा पेट में मुँह डाले सर्दी से कूँ-कूँ कर रहा था। दो में से एक को भी नींद न आती थी। 

हल्कू ने हाथ निकालकर जबरा की ठंडी पीठ सहलाते हुए कहा-कल से मत आना मेरे साथ, नहीं तो ठंडे हो जाओगे। यह रांड पछुआ न जाने कहाँ से बरफ लिए आ रही है। उठूँ, फिर एक चिलम भरूँ। किसी तरह रात तो कटे। आठ चिलम तो पी चुका। यह खेती का मजा है। और एक-एक भाग्यवान ऐसे पड़े हैं, जिनके पास जाड़ा जाए तो गर्मी से घबड़ाकर भागे। मोटे-मोटे गद्दे, लिहाफ, कंबल। मजाल है, जाड़े का गुजर हो जाए। तकदीर की खूबी है। मजूरी हम करे, मजा दूसरे लूटेंगे। 

हल्कू उठा और गड्ढे में से जरा-सी आग निकालकर चिमल भरी। जबरा भी उठ बैठा। हल्कू ने चिलम पीते हुए कहा-पिएगा चिलम, जाड़ा तो क्या जाता है, हाँ, जरा मन बहल जाता है। जबरा ने उसके मुँह की ओर प्रेम से छलकती हुई आँखों से देखा। हल्कू आज और जाड़ा खा ले। कल से मैं यहाँ पुआल बिछा दूँगा। उसी में घुसकर बैठना, तब जाड़ा न लगेगा।

सहसा जबरा ने किसी जानवर की आहट पाई। इस विशेष आत्मीयता ने उसमें एक नई स्फूर्ति पैदा कर दी थी, जो हवा के ठंडे झोंकों को तुच्छ समझती थी। वह झटपट उठा और छतरी के बाहर आकर भोंकने लगा। हल्कू ने उसे कई बार चुमकारकर बुलाया; पर वह उसके पास न आया। हार कर चारों तरफ दौड़-दौड़कर भौंकता रहा। एक क्षण के लिए आ भी जाता तो तुरंत ही फिर दौड़ पड़ता। कर्तव्य हृदय में अरमान की भाँति उछल रहा था। 

एक घंटा और गुजर गया। रात ने शीत को हवा में धधकाना शुरू किया। हल्कू उठ बैठा और दोनों घुटनों को छाती से मिलाकर सिर को उसमें छिपा लिया, फिर भी ठंड कम न हुई। ऐसा जान पड़ता था, सारा रक्त जम गया है, धमनियों में रक्त की जगह हिम बह रहा है। उसने झुककर आकाश की ओर देखा, अभी कितनी रात बाकी है। सप्तर्षि अब भी आकाश में आधे भी नहीं चढ़े। ऊपर आ जाएँगे, तब कहीं सवेरा होगा। अभी पहर से ऊपर रात है।

उसने पास के अरहर के खेत में जाकर कई पौधे उखाड़ लिए और उनका एक झाडू बनाकर हाथ में सुलगता हुआ उपला लिए बगीचे की तरफ चला। जबरा ने उसे आते देखा, तो पास आया और दुम हिलाने लगा।

थोड़ी देर में अलाव जल उठा। उसकी लौ ऊपर वाले वृक्ष की पत्तियों को छू-छूकर भागने लगी। उस अस्थिर प्रकाश में बगीचे के विशाल वृक्ष ऐसे मालूम होते थे, मानो उस अथाह अंधकार को अपने सिरों पर सँभाले हुए हों। अंधकार के उस अनंत सागर में यह प्रकाश एक नौका के समान हिलता, मचलता हुआ जान पड़ता था। 

हल्कू अलाव के सामने बैठा आग ताप रहा था। एक क्षण में उसने दोहर उतारकर बगल में दबा ली और दोनों पाँव फैला दिए; मानों ठंड को ललकार रहा हो, तेरे जी में जो आए सो कर। ठंड की असीम शक्ति पर विजय पाकर वह विजय-गर्व को हृदय में छिपा न सकता था। 

पत्तियाँ जल चुकी थीं। बगीचे में फिर अँधेरा छाया था। राख के नीचे कुछ-कुछ आग बाकी थी, जो हवा का झोंका आ जाने पर जाग उठती थी, पर एक क्षण में फिर आँखें बंद कर लेती थी। हल्कू ने फिर चादर ओढ़ ली और गर्म राख के पास बैठा एक गीत गुनगुनाने लगा। उसके बदन में गर्मी आ गई थी। ज्यों-ज्यों शीत बढ़ती जाती थी, उसे आलस्य दबाए लेता था। 
जबरा जोर से भूँककर खेत की ओर भागा। हल्कू को ऐसा मालूम हुआ कि जानवरों का एक झुंड उसके खेत में आया है। शायद नीलगायों का झुंड था। उनके कूदने-दौड़ने की आवाजें साफ कान में आ रही थीं। फिर ऐसा मालूम हुआ कि वह खेत में चर रही हैं। उनके चरने की आवाज चर-चर सुनाई देने लगी। उसने दिल ने कहा-नहीं, जबरा के होते कोई जानवर खेत में नहीं आ सकता। नोच ही डाले। मुझे भ्रम हो रहा है। कहाँ? अब तो कुछ नहीं सुनाई देता। मुझे भी कैसा धोखा हुआ।

उसने जोर से आवाज लगाई-जबरा, जबरा! जबरा भौंकता रहा। उसके पास न आया। 

फिर खेत में चरे जाने की आहट मिली। अब वह अपने को धोखा न दे सका। उसे अपनी जगह से हिलना जहर लग रहा था। कैसा दंदाया हुआ बैठा था। इस जाड़े-पाले में खेत में जाना, जानवरों के पीछे दौड़ना, असूझ जान पड़ा। वह अपनी जगह से न हिला। 

उसने जोर में आवाज लगाई-होलि-होलि! होलि! जबरा फिर भौंक उठा। जानवर खेत चर रहे थे। फसल तैयार है। कैसी अच्छी खेती थी, पर ये दुष्ट जानवर उसका सर्वनाश किए डालते हैं। हल्कू पक्का इरादा करके उठा और दो-तीन कदम चला, एकाएक हवा का ऐसा ठंडा, चुभने वाला, बिच्छू के डंक का सा झोंका लगा कि वह फिर बुझते हुए अलावा के पास आ बैठा और राख को कुरेदकर अपनी ठंडी देह को गर्माने लगा। वह उसी राख के पास गर्म जमीन पर चादर ओढ़कर सो गया। 

जबरा अपना गला फाड़े डालता था, नीलगायें खेत का सफाया किए डालती थीं और हल्कू गर्म राख के पास शांत बैठा हुआ था। अकर्मण्यता ने रस्सियों की भाँति उसे चारों तरफ से जकड़ रखा था। 

सवेरे जब उसकी नींद खुली, तब चारों तरफ धूप फैल गई थी। और मुन्नी कह रही थी-क्या आज सोते ही रहोगे? तुम यहाँ आकर रम गए और उधर सारा खेत चौपट हो गया। 

हल्कू ने उठकर कहा-क्या तू खेत से होकर आ रही है? मुन्नी बोली-हाँ, सारे खेत का सत्यानाश हो गया। भला ऐसा भी कोई सोता है। तुम्हारे यहाँ मड़ैया डालने से क्या हुआ? 

हल्कू ने बहाना किया-मैं मरते-मरते बचा, तुझे अपने खेत की पड़ी है। पेट में ऐसा दर्द हुआ कि मैं ही जानता हूँ। 

दोनों फिर खेत की डाँड़ पर आए। देखा, सारा खेत रौंदा पड़ा हुआ है और जबरा मड़ैया के नीचे चित्त लेटा है, मानो प्राण ही न हों। दोनों खेत की दशा देख रहे थे। 

मुन्नी के मुख पर उदासी छाई थी। पर हल्कू प्रसन्न था।

मुन्नी ने चिंतित होकर कहा-अब मजूरी करके मालगुजारी भरनी पड़ेगी। 

हल्कू ने प्रसन्न मुख से कहा-रात की ठंड में यहाँ सोना तो न पड़ेगा।

कैसी लगी आपको यह कहानी कमेंट करके जरूर बताएं पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

अनोखी सत्य कहानी: बिना स्त्री पुरुष के मिलन के पैदा हुई अलौकिक कन्या

सृष्टि पर जितने भी जीव हैं सभी का जन्म स्त्री पुरुष के मिलन से ही हुआ है। पुराणों के अनुसार जब सृष्टि का आरंभ हुआ तब ब्रह्मा जी ने अपने योग बल से मनुष्य की उत्पत्ति की। इस क्रिया में बहुत वक्त लगता था। 

ब्रह्मा जी ने भगवान शिव को कठिन तप के बल पर प्रसन्न किया और सृष्टि को बढ़ाने  के लिए अन्य विधि जानने की विनती की। भगवान शिव अर्धनारीश्वर रूप में प्रकट हुए तत्पश्चात मैथुन क्रिया से सृष्टि की वृद्धि होने लगी। 

इतिहास में एक ऐसी कन्या हुई है जिसका जन्म स्त्री पुरुष के मिलन से नहीं हुआ। यह कन्या थी भगवान वेद व्यास जी की माता और महाभारत के भीष्म पितामह की सौतेली मां सत्यवती जिन्हें गंधा नाम से भी जाना जाता है। आईए जानें, इनके जन्म की अनोखी कहानी-  

राजा सुधन्वा वन में शिकार के लिए गए। पीछे से इनकी रानी रजस्वला हुई और उनके मन में गर्भधारण करने की इच्छा जागृत हुई। उन्होंने एक शिकारी पक्षी के माध्यम से राजा के पास संदेश भेजा। जिसमें उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर करी। राजा  ने उस पक्षी को एक पात्र में अपना वीर्य डालकर दिया और कहा इसे रानी को दे देना। 

शिकारी पक्षी ने रानी के पास जाने के लिए उड़ान भरी रास्ते में एक अन्य शिकारी पक्षी के साथ उसकी लड़ाई होने लगी। इसी बीच वीर्य का पात्र यमुना नदी में गिर गया। यमुना में ब्रह्मा जी के श्राप से एक श्रापित अप्सरा मछली रूप में रह रही थी। वीर्य का पात्र उसने ग्रहण कर लिया और वह गर्भवती हो गई। 

गर्भकाल का समय जब पूरा होने वाला था तभी एक मछुआरे के जाल में वह मछली फंस गई। इतनी बड़ी मछली को देखकर सभी मछुआरे बहुत हैरान हुए और इसे राजा सुधन्वा के दरबार में ले गए। राजा की आज्ञा से मछली का पेट काटा गया तो उसमें से एक बालक और एक बालिका निकली। 

बालिका के शरीर से मछली की गंध आ रही थी राजा ने उसे मछुआरे को दे दिया और यह बालिका मत्स्यगंधा कहलाई। बालक को राजा ने रख लिया। समय के साथ-साथ मत्स्यगंधा बड़ी होती गई उसके रूप यौवन में भी निखार आता चला गया। वह अप्सराओं की तरह बहुत सुंदर थी। 

मछुआरे पिता ने मत्स्यगंधा को नाव चलाना सीखा दिया। वह यात्रियों को नाव द्वारा  यमुना पार कराने का काम करने लगी। एक दिन ऋषि पराशर यमुना पार करने के लिए मत्स्यगंधा की नाव में बैठे और उस पर मुग्ध हो गए।

ऋषि पराशर ने उससे अपने प्रेम का इजहार किया और बोले,” वह उससे एक पुत्र उत्पन्न करने की चाह रखते हैं।

“मत्स्यगंधा ने कहा,” आपका और मेरा मिलन कैसे हो सकता है। आप ऋषि और मैं मछुआरे की कन्या। इससे मेरा कौमार्य भी भंग हो जाएगा।

” ऋषि बोले,” मेरी संतान को जन्म देने के बाद भी तुम्हारा कौमार्य भंग नहीं होगा फिक्र मत करो।

” मत्स्यगंधा मान गई। ऋषि पराशर ने अपने तप की शक्ति से चारों ओर घना कोहरा फैला दिया। फिर दोनों का मिलन हुआ। ऋषि पराशर के आशीर्वाद से मत्स्यगंधा के शरीर से आने वाली मछली की दुर्गंध खत्म हो गई और उत्तम सुंगध निकलने लगी। दोनों की संतान के रूप में महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ। 

“विद्दा” एक अमूल्य धन

शिक्षित व्यक्ति सही मायने में संसार में सबसे अधिक धनी व्यक्ति होता है । रुपया पैसा गाड़ी बंगला जेवरात, ये सभी वस्तुये एक समय के बाद समाप्त हो जाती हैं लेकिन शिक्षा एक मात्र ऐसा धन है जो कि जितना खर्च करो बढ़ता ही जाता है । विद्दावान व्यक्ति की हर स्थान पर प्रशंसा होती है व समाज में उच्च स्थान प्राप्त होता है । यह एक ऐसा धन है जिसे ना तो कोई चोर चुरा सकता है, ना ही कोई बांट सकता है, ना ही किसी प्राकृतिक आपदा से यह नष्ट होता है । समय और अनुभव के साथ यह बढ़ता ही जाता है ।

विद्दा के महत्व पर एक कहानी के माध्यम से प्रकाश डालते हैं । एक बार एक राजा जंगल में शिकार करने गया । राजा अत्यंत बलवान था अतः अकेले ही शिकार पर जाता था । शिकार करते-करते  शाम होने को आई । अचानक आसमान में बादल घिर आए और तेज़ बरसात होने लगी । इतने में सूरज भी ढल गया । अंधेरे में राजा रास्ता भटक गए और भूख प्यास से विहाल हो कर एक स्थान पर बैठ गए ।

राजा बहुत चिंतित था कि तभी देखा सामने से तीन बालक चले आ रहे हैं । राजा ने तीनों को अपने पास बुलाकर कहा मै बहुत भूखा हूँ प्यास भी लगी है, रास्ते से भटक गया हूँ क्या तुम लोग मेरी मदद करोगे? राजा की बात सुन तीनों बालक दौड़ कर अपने घर गए और खाने और पीने के पानी के साथ कुछ समय बाद लौटे ।

राजा ने अपनी भूख शांत करने के पश्चात कहा मैं तुम तीनों का आभारी हूँ यदि तुम्हें कुछ चाहिए तो मुझे बताओ मैं तुम्हें दे सकता हूं । इतना सुनकर पहला बालक बोला मुझे बंगला, गाड़ी चाहिए ताकि मैं चैन से जीवन बिता सकूँ । दूसरे ने कहा मुझे ढेर सारा रुपया और जेवर चाहिये ताकि इस दरिद्रता से मुझे छुटकारा मिल सके । राजा ने कहा अवश्य तुम जो भी चाहोगे मै तुम्हें जरूर दूंगा । इतना कहकर राजा ने तीसरे बालक की ओर रुख किया । तुम भी कहो बालक तुम्हें क्या चाहिए??

तीसरे बालक ने कहा महाराज मुझे धन दौलत की लालसा नहीं है मेरी बस एक इच्छा है । महाराज ने कहा कहो, क्या इच्छा है तुम्हारी ¡ मै पढ़ना चाहता हूं, विद्दा अर्जित करना चाहता हूँ । महाराज ने उसे विद्दा ग्रहण करने के लिए आश्रम भिजवा दिया । कुछ समय बाद वो एक विद्वान बन गया और खुशी खुशी राजा ने उसको अपने दरबार में रत्न की उपाधि के साथ स्थान दिया ।

वहीं बाढ़ आ जाने से दूसरे दोस्त का बंगला गाड़ी सब तहस नहस हो गया और वापस वह दरिद्र हो गया । तीसरे का भी धन अब खत्म होने को आया था, आखिर रखा धन कितने दिन तक चलने वाला था । विद्वान मित्र की एक दिन पुराने दोनों मित्रों से भेंट हुई तो दोनों को उसने दरिद्र अवस्था में पाया । दोनों विद्वान मित्र से उसकी खुशहाली का कारण पूछने लगे । विद्वान ने बताया तुम दोनों ने राजा से धन मांगा, जो कि मै जानता था कि एक दिन समाप्त हो जाएगा । अतः मैंने राजा से विद्या रूपी धन मांगा था । यह धन सदैव मेरे साथ रहेगा । कभी ना खर्च हो सकने वाले इस धन ने मुझे मान सम्मान और प्रतिष्ठा सभी से धनवान बना दिया ।

दोनों मित्र अब अपनी मूर्खता पर पछता रहे थे । इसलिए कहा जाता है कि विद्दा एक अमूल्य धन है जो कभी समाप्त नहीं होता अपितु बढ़ता ही जाता है ।

आज के युग में भी विद्दा से बड़ा कोई धन नहीं । अगर कोई विद्द्वान है तो अपनी शिक्षा के बल पर वह अपना जीवन ख़ुशी से और समृद्ध तरीके से बिता सकता है. ये सीख हर एक युवा को लेनी चाहिए कि चाहे कुछ भी हो जाए अपनी शिक्षा ज़रूर ग्रहन करे. शिक्षा के बल पर मान सम्मान और समृद्धि मिल सकती है लेकिन अशिक्षित व्यक्ति का धन एक ना एक दिन तो ख़त्म हो ही जाएगा और वह फिर से दरिद्र बन जाएगा.